Do Bailon ki Katha
गद्य खंड
यह खंड प्रेमचंद की कहानी 'दो बैलों की कथा' पर आधारित है।
भूमिका
- सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' के अनुसार, गद्य कवियों की कसौटी है, और निबंध गद्य की कसौटी है।
- रामचंद्र शुक्ल कहते हैं कि भाषा की पूर्ण शक्ति का विकास निबंधों में ही सबसे अधिक संभव होता है।
- प्रेमचंद के अनुसार, कहानी एक ऐसी रचना है जिसमें जीवन के किसी अंग या किसी एक मनोभाव को प्रदर्शित करना ही लेखक का उद्देश्य रहता है।
- रेल फ़ॉक्स के अनुसार, अच्छा गद्य लिखने की कला चीजों को उनके सही नाम से पुकारने की कला है।
प्रेमचंद
- जन्म: 1880, बनारस के लमही गांव में।
- मूल नाम: धनपत राय।
- शिक्षा: बी.ए. तक।
- उन्होंने शिक्षा विभाग में नौकरी की, लेकिन असहयोग आंदोलन में सक्रिय भाग लेने के लिए सरकारी नौकरी से त्यागपत्र दे दिया।
- 1936 में देहांत।
- कहानियां: मानसरोवर के आठ भागों में संकलित।
- प्रमुख उपन्यास: सेवासदन, प्रेमाश्रम, रंगभूमि, कायाकल्प, निर्मला, गबन, कर्मभूमि, गोदान।
- पत्रिकाएँ: हंस, जागरण, माधुरी आदि का संपादन।
- कथा साहित्य के अतिरिक्त, प्रेमचंद ने निबंध एवं अन्य प्रकार का गद्य लेखन भी प्रचुर मात्रा में किया।
- प्रेमचंद साहित्य को सामाजिक परिवर्तन का सशक्त माध्यम मानते थे।
- उन्होंने जिस गांव और शहर के परिवेश को देखा और ज