Incremental Sheet Forming – Hindi Study Notes
परिचय
- शीट मेटल के बड़े-पैमाने पर उत्पादन में पारम्परिक रूप से डीप ड्राइंग व स्टैम्पिंग प्रयोग होते रहे हैं।
- प्रोटोटाइप तैयार करना द्रुत व लचीले निर्माण (flexible manufacturing) की अनिवार्य प्रथम कड़ी है, जिसके लिये न्यूनतम निवेश व समय वांछित है।
- इंक्रीमेंटल शीट फ़ॉर्मिंग (ISF) एक ऐसी विधि है जिसमें डाई की आवश्यकता नहीं होती; शीट को स्थानीय रूप से टूल-शीट संपर्क क्षेत्र में क्रमिक प्लास्टिक विकृति देकर आकार दिया जाता है।
ISF की वर्गीकरण
- आकृति 1 में ISF को निम्न आधारों पर वर्गीकृत किया गया है
• फ़ॉर्मिंग टूल: गोलाकार/हेमिस्फ़ेरिकल, रोलर बॉल
• फ़ॉर्मिंग स्ट्रैटेजी: सिंगल-स्टेज, मल्टी-स्टेज
• तापमान: ऐम्बियंट, एलिवेटेड
• मशीनरी: CNC मिलिंग, रोबोट
• विधि:
– Single-point
– Two-point
– Multi-point
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
- ISF की अवधारणा 1967 के दो पेटेन्ट (Berghahn – General Electric, Leszak) से प्रारम्भ मानी जाती है।
- Berghahn पद्धति: शीट को तीनों दिशाओं में गति देकर विकृत करता है।
- Leszak पद्धति: घूमते रोलर से स्थानीय क्षेत्र में शीट को लाइनर डिसआर्टिकुलेशन द्वारा मोड़ता है।
सिंगल पॉइंट इंक्रीमेंटल फ़ॉर्मिंग (SPIF)
- SPIF, लेयर-बाय-लेयर इंजीनियरिंग के समान एक बिंदु पर क्रमिक विकृति कराता है।
- बुनियादी घटक:
• शीट
• वर्क-होल्डिंग फ़िक्स्चर
• CNC मशीन
• बेलनाकार रॉड-टाइप टूल (चित्र 2) - प्रमुख लाभ: पारम्परिक डोम टेस्ट की तुलना में अधिक स्ट्रेन क्षमता, शीट की फॉर्मेबिलिटी वृद्धि।
प्रक्रिया के प्रमुख पैरामीटर
- स्वतंत्र चर जो अन्तिम गुण पर प्रभाव डालते हैं:
• स्टेप साइज/डेप्थ
• फीड रेट
• टूल का व्यास
• स्पिंडल घूर्णन गति
• प्रारम्भिक शीट मोटाई
• अन्तिम वॉल एंगल - आकृति 6 में इन पैरामीटरों का परस्पर सम्बन्ध दिखाया गया है।
फॉर्मिंग लिमिट कर्व (FLC)
- Keeler व Marciniak द्वारा प्रतिपादित FLD शीट की फॉर्मेबिलिटी आँकने का साधन।
- ISF हेतु FLC E<em>1 (major strain)–E</em>2 (minor strain) ग्राफ़ में ऋणात्मक ढलान वाली रेखा प्रदर्शित करता है।
- ISF में पारम्परिक रूप से ‘नेकिंग’ नहीं पाई जाती; शीट सीधे फ्रैक्चर तक जाती है।
- स्ट्रेन क्षमता पारम्परिक विधियों से 8–10 गुना अधिक रिपोर्ट की गयी।
प्रेरणा (Motivation)
- हवाई जहाज़ के फ्रंट कोन आदि कठोर-से-रूपित सामग्रियों को अभी भी पारम्परिक डाई आधारित तरीकों से बनाया जाता है।
- दाइयों की उच्च लागत, डिज़ाइन परिवर्तन की कठिनाई, उच्च शक्ति-आवश्यकता, तथा CAD/CAM के साथ न्यून एकीकरण – ये सभी सीमाएँ SPIF द्वारा दूर की जा सकती हैं।
पूर्व शोध (Literature Review)
- Kim et al. (2002): टूल साइज, फीड, घर्षण, एनिसोट्रॉपी इत्यादि का प्रभाव; कम फीड व उपयुक्त रोलर टूल से फॉर्मेबिलिटी सुधरी।
- Martins et al. (2008): बाय-डायरेक्शनल इन-प्लेन घर्षण मॉडल से अधिकतम स्थानीय विकृति का विश्लेषण।
- Hussain et al. (2010): स्पाइरल वॉल प्रोफ़ाइल से विकसित नई लिमिट कर्व; पारम्परिक ग्रूव टेस्ट की तुलना में quadratic प्रवृत्ति एवं उच्च सीमा-स्ट्रेन पाई।
- Hamilton et al. (2010): उच्च स्पिंडल स्पीड व फीड पर माइक्रोस्ट्रक्चर समान रहा; स्टेप साइज व शेप-फ़ैक्टर से ‘ऑरेंज पील’ प्रभावित।
- Malhotra et al. (2011): FEM-आधारित डैमेज मॉडल में हाइड्रोस्टैटिक दाब व देवीएटोरिक तनाव से फ्रैक्चर एन्वेलप भविष्यवाणी; प्रयोग संगत।
- Bhattacharya et al. (2011): सम्पूर्ण फैक्ट्रोरियल डिज़ाइन; छोटा टूल व बड़ा वॉल-एंगल सतह गुणवत्ता सुधारते, पर टूल व्यास बढ़ने से फॉर्मेबिलिटी घटती।
प्रायोगिक विवरण
- सामग्री: Inconel 625 130mm×131mm×0.6mm शीट (निकेल-क्रोमियम-आयरन सुपरऐलॉय)।
• रासायनिक संरचना (wt %): Ni 58!–71,Cr21!–23,Mo8!–10,Fe5,Nb3.2!–3.8 आदि। - प्रयोगीय फ्लो (चित्र 3.1): सामग्री → टूल पाथ जेनरेशन → SPIF → परिणाम विश्लेषण (फ्रैक्चर डेप्थ, सतह खुरदरापन, FLC)।
प्रस्तावित कार्यप्रणाली – टूल पाथ
- मशीन की मुख्य स्पिंडल को सटीक X,Y,Z निर्देशांक चाहिये।
- जावा प्रोग्राम द्वारा ट्रन्केटेड कोन के लिये हेलिकल टूल पाथ जेनरेट किया गया।
- लक्षित वॉल एंगल 60∘; आयाम: ऊँचाई 25mm, R<em>minor=16.56mm,R</em>major=31mm।
- टूल पाथ प्रकार:
• हेलिकल (continuous)
• Z-लेवल (discontinuous) – प्रत्येक परत पर परिधि चलन, फिर अगली स्टेप साइज से नीचे जाना।
SPIF सेट-अप
- घटक:
• CNC स्पिंडल
• शीट क्लैम्पिंग फ़िक्स्चर
• टूल (हेमिस्फ़ेरिकल सिरा)
• सतह खुरदरापन टेस्टर
परिणाम एवं चर्चा – फॉर्मेबिलिटी
- टैगुची L9 लेआउट: स्टेप साइज (0.2,0.3,0.4mm), फीड (250,400,550mm/min), स्पिंडल स्पीड (0,200,400rpm)।
- अधिकतम फ्रैक्चर डेप्थ (मेजरमेंट – वर्नियर हाइट गेज): 12.10–14.02mm।
- SN-Ratio response:
• स्टेप साइज का Delta =0.37 (Formability पर सर्वोच्च प्रभाव, Rank 1)। - मेन-इफ़ेक्ट प्लॉट: स्टेप साइज 0.4mm एवं फीड 550mm/min पर औसत फ्रैक्चर डेप्थ ≈13.5mm।
- ऑप्टिमाइज़र: वांछित संयोजन – स्टेप 0.4mm,फीड550mm/min,स्पिंडल400rpm; प्रत्याशित ymax=13.54mm (DESIRABILITY D=0.7604)।
परिणाम एवं चर्चा – सतह खुरदरापन (Ra)
- Ra मान 0.89–1.46μm।
- Response तालिका: स्टेप साइज का Delta =2.6422 (सर्वाधिक प्रभाव), फीड दूसरा, स्पिंडल सबसे कम।
- ग्राफ़: सतह पर ‘ऑरेंज पील’ प्रभावित करने वाले प्रायः स्टेप साइज व जियोमेट्रिक फ़ैक्टर।
फॉर्मिंग लिमिट कर्व के परिणाम
- ISF किये गये स्पेसिमेन पर FLD परीक्षण से सामग्री द्विपाक्षीय स्ट्रेचिंग क्षेत्र में अधिक सुरक्षित दूरी दिखाती है।
- प्रयोग में प्राप्त सीमाएँ पारम्परिक Necking-आधारित लिमिट से ऊपर रहीं, पुष्टि करती है कि ISF शीट को अधिक विकृति सहने देता है।
निष्कर्ष
- 0.2–0.3mm स्टेप पर Formability लगभग नियत रहती है; 0.3→0.4mm वृद्धि पर स्ट्रेन-कठिनन (strain-hardening) कारण अधिक टेम्परेचर, परिणामतः अधिक फ्रैक्चर डेप्थ।
- फीड रेट बढ़ने से टूल-शीट घर्षणात्मक तापन घटता; फॉर्मेबिलिटी व सतह दोनों सुधरते।
- स्टेप साइज दोनों लक्ष्य गुणों (Fracture Depth व Ra) हेतु निर्णायक पैरामीटर सिद्ध हुआ।
- SPIF द्वारा Inconel 625 जैसी ‘hard-to-form’ सुपरऐलॉय को बिना विशेष डाइ की आवश्यकता के सफलतापूर्वक रूपित किया जा सकता है।
संदर्भ
- विस्तृत सूचि पृष्ठ 31-32 के अनुरूप (Fratini et al., Emmens et al., Kumar & Kumar, आदि) दिया गया।